पिथौरागढ़। 130 पर्यावरण टेरिटोरियल आर्मी बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन पर रोक लगाए जाने के बाद पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़ ने सरकार के रवैये पर गंभीर नाराजगी जताई है। संगठन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को विस्तृत शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि पूरे आंदोलन का नेतृत्व करने के बावजूद आज तक संगठन को न तो शासन स्तर से कोई आधिकारिक सूचना दी गई और न ही विस्थापन रोकने संबंधी आदेश की प्रति उपलब्ध कराई गई।

संगठन का कहना है कि जनपद से 130 पर्यावरण बटालियन को हटाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ पूर्व सैनिक संगठन के नेतृत्व में 62 दिनों तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक जनआंदोलन चलाया गया। इसी संघर्ष ने इस मुद्दे को प्रदेश से लेकर देश के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाया। संगठन का दावा है कि यदि समय रहते यह आंदोलन नहीं होता तो आज यह महत्वपूर्ण पर्यावरणीय एवं सैन्य धरोहर पिथौरागढ़ से विस्थापित हो चुकी होती।

पूर्व सैनिक संगठन ने कहा कि 130 पर्यावरण बटालियन केवल एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि हिमालयी पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन, वनीकरण, सीमांत विकास और हजारों पूर्व सैनिक परिवारों की भावनाओं से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर है। इसे बचाने के लिए 85 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ पूर्व सैनिकों, युद्ध वीरों, वीर नारियों और आम नागरिकों ने अनुशासन एवं लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर अभूतपूर्व सहयोग दिया।

मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में संगठन ने कहा कि विभिन्न माध्यमों से विस्थापन पर रोक लगाए जाने की जानकारी मिली, लेकिन पूरे संघर्ष का नेतृत्व करने वाले पूर्व सैनिक संगठन को सरकार की ओर से कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई। संगठन ने इसे हजारों पूर्व सैनिकों की भावनाओं की उपेक्षा बताते हुए कहा कि निर्णय के बाद सरकार का नैतिक दायित्व था कि वह आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संगठन से संवाद स्थापित करती।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान सक्रिय न रहने वाले कुछ लोग अब इस उपलब्धि का श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य कभी श्रेय लेना नहीं रहा, बल्कि जनपद, पर्यावरण और समाज के हितों की रक्षा करना ही उसका लक्ष्य रहा है। संगठन ने स्वयं को पूर्णतः गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा कि वह केवल राष्ट्रहित और समाजहित के मुद्दों पर कार्य करता है।

पूर्व सैनिक संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि 130 पर्यावरण बटालियन के विस्थापन पर रोक संबंधी आदेश की प्रमाणित प्रति तत्काल उपलब्ध कराई जाए, संगठन के साथ शीघ्र औपचारिक संवाद स्थापित किया जाए तथा भविष्य में इस महत्वपूर्ण विषय पर पूर्व सैनिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। साथ ही सीमांत एवं सैनिक बाहुल्य जनपद पिथौरागढ़ के पूर्व सैनिकों के साथ समय-समय पर संवाद कर उनकी भावनाओं का सम्मान करने की भी अपील की गई है।