देहरादून। 38वें राष्ट्रीय खेल उत्तराखण्ड-2025 से जुड़े अपने लंबित भुगतान के लिए लंबे समय से प्रयासरत पाण्डवाज़ को आखिरकार राहत मिल गई है। पाण्डवाज़ ने मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उनका बकाया भुगतान प्राप्त होने की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री और उन सभी लोगों के प्रति आभार जताया है, जिन्होंने उनकी आवाज को आगे पहुंचाने में सहयोग किया।

पाण्डवाज़ ने अपने आभार पत्र में बताया कि मुख्यमंत्री ने उनके खुले पत्र के माध्यम से सामने आई समस्या का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद सभी बकाया भुगतान मात्र छह दिनों के भीतर प्राप्त हो गए।

दरअसल, 38वें राष्ट्रीय खेल उत्तराखण्ड-2025 के दौरान पाण्डवाज़ ने थीम सॉन्ग तैयार करने के साथ मशाल यात्रा के विभिन्न कार्यक्रमों में प्रस्तुति दी थी और राष्ट्रीय खेलों के उद्घाटन समारोह का भी हिस्सा रहे थे। पाण्डवाज़ का कहना था कि उन्होंने उत्तराखण्ड की संस्कृति, पहचान और लोककला को देशभर तक पहुंचाने के उद्देश्य से पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई।

लेकिन दिसम्बर 2024 और जनवरी 2025 में किए गए इन कार्यों का भुगतान लंबे समय तक लंबित रहा। करीब 20-21 महीने तक भुगतान नहीं होने के बाद पाण्डवाज़ ने मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिखकर अपनी समस्या सामने रखी थी।

इससे पहले भुगतान के लिए सीएम हेल्पलाइन, खेल विभाग, खेल मंत्री, संबंधित अधिकारियों और मुख्यमंत्री आवास स्थित हेल्पडेस्क तक शिकायत और अनुरोध किए जाने की बात भी पाण्डवाज़ ने कही थी। उनके अनुसार शुरुआती शिकायत का समाधान किए बिना मामला बंद कर दिया गया था और दोबारा शिकायत के बाद भी समस्या बनी रही।

पाण्डवाज़ की इस समस्या को वाणी न्यूज़ ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर में 20 महीने से लंबित भुगतान और पाण्डवाज़ की मुख्यमंत्री से की गई गुहार को सामने रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए गए थे।

वाणी न्यूज़ की प्रकाशित खबर में पाण्डवाज़ के उस पत्र का भी उल्लेख किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोशल मीडिया पर अपनी बात रखना उनकी इच्छा नहीं बल्कि लगातार सुनवाई न होने के कारण मजबूरी बन गया था ।

अब भुगतान मिलने के बाद पाण्डवाज़ ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उनकी लंबे समय से लंबित समस्या का समाधान हुआ। साथ ही उन्होंने उन क्रिएटर्स, पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स और शुभचिंतकों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उनके खुले पत्र को गंभीरता से लिया और उसे अपने-अपने माध्यमों से आगे पहुंचाया।

पाण्डवाज़ ने कहा कि उत्तराखण्ड की कला, संस्कृति और अपनी मातृभूमि के लिए वे आगे भी पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करते रहेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई कि लगभग 20 महीने से लंबित भुगतान का मामला सार्वजनिक रूप से उठने के बाद महज छह दिनों में सुलझ गया। इससे यह सवाल भी स्वाभाविक रूप से सामने आता है कि यदि मामले के समाधान के लिए मुख्यमंत्री स्तर पर हस्तक्षेप आवश्यक था, तो इतनी लंबी अवधि तक यह भुगतान प्रशासनिक स्तर पर क्यों अटका रहा?

फिलहाल भुगतान मिलने के बाद पाण्डवाज़ ने मामले को लेकर सरकार के प्रति आभार जताते हुए इस अध्याय के समाप्त होने की बात कही है।