पिथौरागढ़। कारगिल युद्ध के अमर वीर शहीद गिरीश सामंत की पुण्यतिथि 25 जुलाई को देवलथल स्थित शहीद द्वार एवं शहीद स्मारक पर पूरे सम्मान, श्रद्धा और राष्ट्रभक्ति के साथ मनाई जाएगी। कार्यक्रम की तैयारियां शहीद के परिजनों एवं पूर्व सैनिक संगठन द्वारा युद्ध स्तर पर की जा रही हैं। आयोजन को भव्य, प्रेरणादायी और ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
देवलथल क्षेत्र में कार्यक्रम के सफल संचालन की जिम्मेदारी क्षेत्र संयोजक शंकर सिंह सामंत के नेतृत्व में निभाई जा रही है। वहीं, शहीद स्मारक, शहीद द्वार और परिसर की साफ-सफाई, रखरखाव एवं सौंदर्यीकरण का कार्य नायब सूबेदार किशन सिंह पूरी निष्ठा के साथ कर रहे हैं। लगातार प्रतिकूल मौसम के बावजूद वे स्मारक को गरिमामय स्वरूप देने में जुटे हुए हैं।
इस अवसर पर नायब सूबेदार किशन सिंह ने कहा कि शहीदों का बलिदान केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग की अमिट प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारकों का संरक्षण और ऐसे आयोजनों को सम्मानजनक एवं भव्य रूप देना प्रत्येक पूर्व सैनिक ही नहीं, बल्कि हर देशभक्त नागरिक का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने कहा कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि यहां के लोगों की सैनिक परंपरा, राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण से है। दो-दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे इस जनपद में आज तक राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का न होना यहां के नागरिकों के देशप्रेम और सैन्य संस्कारों का प्रमाण है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में राष्ट्रसेवा और देशभक्ति की भावना को और अधिक मजबूत करते हैं।
शहीद की वीरांगना श्रीमती शांति सामंत ने जनपदवासियों, पूर्व सैनिकों, युवाओं, विद्यार्थियों एवं सभी देशभक्त नागरिकों से 25 जुलाई को आयोजित पुण्यतिथि समारोह में उपस्थित होकर वीर सपूत को श्रद्धासुमन अर्पित करने का भावपूर्ण आह्वान किया है।
पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ के उपाध्यक्ष सूबेदार मेजर रमेश सिंह महर कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा को अंतिम रूप दे रहे हैं। संगठन की ओर से जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, गणमान्य नागरिकों, पूर्व सैनिकों, विद्यार्थियों और आम जनता को समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।
पूर्व सैनिक संगठन ने अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कारगिल के अमर वीर शहीद गिरीश सामंत को श्रद्धांजलि अर्पित करें तथा राष्ट्र की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूतों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।
"शहीद कभी मरते नहीं, वे राष्ट्र की आत्मा बनकर सदैव जीवित रहते हैं। उनका बलिदान ही हमारी स्वतंत्रता, सुरक्षा और सम्मान की सबसे मजबूत नींव है।"


