थल, पिथौरागढ़।

थल तहसील के जुजौली गांव निवासी और क्षेत्र में 500 से अधिक प्रसव कराने वाली दाई मां कुशली देवी कार्की का 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन के करीब पांच से छह दशक पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में जरूरतमंद महिलाओं की प्रसव के दौरान सहायता करने में बिताए।

उस दौर में जब पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहद सीमित थीं और अस्पताल दूर हुआ करते थे, कुशली देवी अपने अनुभव और सेवा भाव से ग्रामीण परिवारों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहती थीं। बारिश, ठंड और रात के अंधेरे में भी वे प्रसव की सूचना मिलने पर घर से निकल पड़ती थीं। बताया जाता है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में 500 से अधिक प्रसव कराए और जच्चा-बच्चा की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कुशली देवी के पास कोई औपचारिक चिकित्सकीय प्रशिक्षण, सरकारी पद या राजनीतिक पहचान नहीं थी, लेकिन वर्षों के अनुभव और मानवीय संवेदना ने उन्हें क्षेत्र में एक भरोसेमंद दाई के रूप में पहचान दिलाई। उनकी निस्वार्थ सेवा से क्षेत्र के अनेक परिवार लाभान्वित हुए। हालांकि उन्हें उनकी सेवाओं के अनुरूप कोई बड़ा सम्मान या आधिकारिक पहचान नहीं मिल सकी।

कुशली देवी ने 27 सितंबर की शाम करीब साढ़े सात बजे अपने पैतृक गांव जुजौली में अंतिम सांस ली। सोमवार को सुबह करीब 11 बजे रामगंगा और क्रांति नदी के त्रिवेणी संगम पर नम आंखों के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया।

उनका 95 वर्ष का जीवन संघर्ष, सेवा, त्याग और मानवीय संवेदना की मिसाल रहा। उनके निधन से परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। _ अनिल कार्की थल