टिहरी गढ़वाल। लंबे समय से जर्जर पड़े डोबरा - चांठी मोटर मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश उस समय सामने आया, जब सामाजिक कार्यकर्ता प्रिंसी रावत अपनी 9 माह की बच्ची को गोद में लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचीं और सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा।
मीडिया से बातचीत में प्रिंसी रावत ने कहा कि जब उनकी बेटी उनके गर्भ में थी, तब भी लगभग 6.9 किलोमीटर लंबे डोबरा-चांटी मोटर मार्ग की स्थिति बेहद खराब थी। आज उनकी बेटी 9 माह की हो चुकी है, लेकिन सड़क की हालत अब भी वैसी ही बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि जर्जर सड़क के कारण क्षेत्र के लोगों, विशेषकर बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार अस्पताल से उपचार कर लौटने वाले मरीजों को भी खराब सड़क के कारण सुरक्षित घर तक पहुँचाना मुश्किल हो जाता है।
प्रिंसी रावत ने कहा, "यदि सरकार इस सड़क का निर्माण नहीं कर सकती तो हमें लिखित में बता दे। हम क्षेत्रवासी मिलकर स्वयं सड़क बना लेंगे। अब केवल 'जल्द होगा' नहीं, बल्कि वर्क ऑर्डर जारी होने की तारीख चाहिए।"
इसके बाद टिहरी की जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने प्रिंसी रावत से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने बताया कि डोबरा-चांटी मोटर मार्ग के निर्माण के लिए लगभग ₹3 करोड़ का प्राक्कलन तैयार कर लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव को भेज दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले का शीघ्र समाधान कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, प्रिंसी रावत ने कहा कि क्षेत्र की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं है। लोगों की मांग है कि सड़क निर्माण का वर्क ऑर्डर कब जारी होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी दी जाए।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि शीघ्र कार्यादेश जारी होता है तो वर्षों से सड़क की समस्या झेल रहे लोगों को राहत मिल सकती है। वहीं, देरी होने पर आंदोलन तेज होने की संभावना भी बनी हुई है।


