देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कांग्रेस के दो महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की है। यह फैसला उनके पूर्व ओएसडी और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के एक दिन बाद सामने आया है। इस घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस की राजनीति के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चाओं को तेज कर दिया है।
किन पदों से दिया इस्तीफा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनकी वजह से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे संघर्ष पर किसी तरह का सवाल खड़ा हो।
रावत का यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे राजनीतिक केंद्र में आ रही हैं।
चंदन जीना के ठिकाने पर क्या मिला?
ED ने 10 सितंबर को देहरादून में कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। इनमें चंदन सिंह जीना का आवास भी शामिल था। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, जीना वर्तमान में हरीश रावत के PA हैं और 2014 से 2017 के दौरान रावत के मुख्यमंत्री रहने के समय OSD के तौर पर काम कर चुके हैं।
ED के अनुसार, तलाशी में जीना के परिसर से:
32 लाख रुपये की बेहिसाबी नकदी लगभग 200.5 ग्राम सोना, जिसमें सोने के सिक्के और चेन शामिल हैं 12 लग्जरी घड़ियां जीना और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में मौजूद 52.16 लाख रुपये फ्रीज एक मोबाइल फोन, जिसे फोरेंसिक जांच के लिए जब्त किया गया है। इन बरामदगियों और फ्रीज की गई रकम का कुल मूल्य करीब 1.28 करोड़ रुपये बताया गया है, हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में घड़ियों का मूल्य अलग से होने की बात कही गई है।
2016 की VPDO परीक्षा से जुड़ा है मामला ED की कार्रवाई 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है।
एजेंसी के मुताबिक जांच उत्तराखंड पुलिस और विजिलेंस ब्यूरो की चार FIR से आगे बढ़ी। ED ने आरोप लगाया है कि परीक्षा की OMR शीट को सुरक्षित कस्टडी से बाहर ले जाकर उनमें कथित तौर पर बदलाव किए गए और इसके बदले अवैध रकम का लेन-देन हुआ। कार्रवाई में तत्कालीन UKSSSC अधिकारियों, OMR प्रोसेसिंग करने वाली निजी कंप्यूटर एजेंसी और कथित बिचौलियों से जुड़े परिसरों को भी शामिल किया गया।
रावत ने आरोपों पर क्या कहा?
हरीश रावत ने अपने सहयोगी को लेकर सामने आए आरोपों पर सवाल उठाए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कहा कि उन्हें अपने सहयोगी पर विश्वास है और ED की कार्रवाई को चुनाव से पहले एक खास "नैरेटिव" तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुई भर्तियों में कोई गलती हुई है तो वह उसके लिए जनता के सामने जवाबदेह होने और माफी मांगने को तैयार हैं।
2027 से पहले क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे प्रमुख और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके दो महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफे की घोषणा को महज संगठनात्मक फैसला नहीं माना जा रहा। खासकर तब, जब राज्य अगले विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है।
ED की कार्रवाई सीधे हरीश रावत के खिलाफ नहीं, बल्कि चंदन सिंह जीना और 2016 की भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा है। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम में आरोपों को अभी जांच के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। ED की जांच जारी है और बरामद संपत्ति के स्रोत तथा मामले में संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर एजेंसी आगे जांच कर रही है।
सियासी संदेश क्या?
रावत का इस्तीफा ऐसे वक्त आया है जब कांग्रेस खुद भाजपा सरकार पर भर्ती परीक्षाओं और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लगातार हमलावर रही है। ऐसे में अपने करीबी सहयोगी से जुड़ी ED कार्रवाई के बाद पद छोड़कर रावत ने पार्टी के लिए राजनीतिक नुकसान को सीमित करने की कोशिश की है—हालांकि दूसरी ओर उन्होंने कार्रवाई को राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश भी बताया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह रावत का कांग्रेस के भीतर दबाव कम करने वाला रणनीतिक कदम है या 2027 के चुनाव से पहले उत्तराखंड कांग्रेस की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत?
स्रोत: PTI/ThePrint, Indian Express, NDTV, Aaj Tak, Navbharat Times और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स।


