पिथौरागढ़। 20 सितम्बर को उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक छोलिया नृत्य ने एक बार फिर बड़े मंच पर अपनी पहचान दर्ज कराई। प्रसिद्ध बांसुरी वादक एवं लोक कलाकार मोहन जोशी के नेतृत्व में उत्तराखंड के छोलिया कलाकारों ने Zee TV के मंच पर शानदार प्रस्तुति देकर पहाड़ की संस्कृति की झलक देश-दुनिया के सामने पेश की।
इस प्रस्तुति में पिथौरागढ़ के क्वीतड़ क्षेत्र से दीपक, अर्जुन, ललित और सुनील तथा बागेश्वर से अजय चंदोला ने छोलिया नर्तक के रूप में हिस्सा लिया। कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य और नृत्य की जीवंत प्रस्तुति के माध्यम से उत्तराखंड की लोक परंपरा को मंच पर उतारा।
दल नायक मोहन जोशी ने बताया कि इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के गायक नीरज उप्रेती ने सा रे गा मा पा के लिए ऑडिशन दिया था। चयन की प्रक्रिया में कई पड़ावों से गुजरने के बाद उन्हें बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। प्रस्तुति के दौरान नीरज उप्रेती की सुरीली आवाज मैं फ़िल्मी गीत राता लाम्बिया लाम्बिया के साथ उत्तराखंड के प्रसिद्ध दिवंगत लोकगायक स्व. पप्पू कार्की द्वारा गाए गए गीत “ए जा वे ये डाना पार” को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया। पारंपरिक लोकनृत्य छलिया को भी इसी मे समयोजिय किया गया। इस गीत की धुन और गायन के साथ छोलिया नृत्य का संयोजन दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहा।
मोहन जोशी ने कहा कि Zee TV जैसे बड़े वैश्विक मंच पर उत्तराखंड का पारंपरिक लोकनृत्य पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहते हैं, उन्हें अपनी कला को आगे बढ़ाने के अवसर जरूर मिलते हैं। वहीं नीरज उप्रेती की सुरीली आवाज ने भी प्रस्तुति के दौरान दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। भले ही वे चयन के अंतिम पड़ाव तक नहीं पहुंच पाए, लेकिन उनकी प्रस्तुति ने उत्तराखंड की लोकधुनों और संस्कृति को बड़े मंच पर यादगार पहचान दिलाई।
छोलिया की थाप, पहाड़ की धुन और लोकगायन के इस संगम ने एक बार फिर साबित किया कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति केवल पहाड़ों तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता रखती है। कपिल भट्ट वाणी न्यूज़


