पिथौरागढ़। ऐतिहासिक अस्कोट क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीण एकता मंच एवं अस्कोट विकास संघर्ष समिति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित 13 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि अस्कोट क्षेत्र का गौरवशाली ऐतिहासिक और सामरिक महत्व रहा है, लेकिन आजादी के बाद से क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं की स्थिति में सुधार नहीं हो पाया है। कई गांवों का संपर्क मार्गों से जुड़ाव भी प्रभावित है, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ये हैं अस्कोट क्षेत्र की 13 प्रमुख मांगें अस्कोट विकास संघर्ष समिति की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें उठाई गई हैं— श्री मलिकार्जुन मंदिर का सौंदर्यीकरण तथा मोटर मार्ग को जीआईसी फील्ड तक पहुंचाना।
अस्कोट को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाना।
अस्कोट में जिला अस्पताल/अतिरिक्त स्वास्थ्य केंद्र का उच्चीकरण तथा स्वास्थ्य विभाग की खाली जमीन पर प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना।
अस्कोट से दयाकोट, गैराड़, धार और जमतड़ी तक मोटर मार्ग का निर्माण।
देवल से कूटा (बरती-खड़ियानी) तक मोटर मार्ग का निर्माण।
बेड़ा से शहीद महिमन सिंह बिष्ट के गांव गडाली तक तथा बड़ीनगांव संपर्क मार्ग का निर्माण।
सैंवल (बेड़ा) में मिनी स्टेडियम का निर्माण।
ईश्वरधार घाट (तितरी) में शवदाह केंद्र का निर्माण।
स्वीकृत अस्कोट–गोरीगंगा लिफ्ट पेयजल योजना को वित्तीय स्वीकृति प्रदान करना।
आईटीआई की खाली भूमि पर पॉलीटेक्निक की स्थापना।
हेल्पिया–जेठीगांव रोड का डामरीकरण तथा पुल निर्माण, साथ ही सावलीसेरा ल्यूजपानी में मोटर पुल का निर्माण।
गौरव हत्याकांड के विरोध में दर्ज झूठे मुकदमों को वापस लेना।
राजकीय इंटर कॉलेज (रा.इ.का.) का नाम समाजसेवी स्वर्गीय राजेंद्र सिंह पाल के नाम पर रखना।
6 नवंबर तक समाधान की मांग, 7 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी ज्ञापन में समिति ने शासन से मांगों पर 6 नवंबर 2026 तक अमल करने की मांग की है। समिति के अनुसार, निर्धारित समय तक समाधान नहीं होने पर 7 नवंबर से सांकेतिक विरोध शुरू किया जाएगा। इसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होने पर 10 नवंबर से भूख हड़ताल करने तथा आगे क्षेत्र में चुनाव बहिष्कार के लिए मजबूर होने की चेतावनी दी गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि यह ज्ञापन केवल औपचारिक मांगपत्र नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता की भावनाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने शासन से अस्कोट के विकास और जनसमस्याओं के निस्तारण को प्राथमिकता देने की अपील की।
जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने दिखाई एकजुटता ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में ग्राम प्रधान देवल टिकेंद्र पाल, हिनकोट के कपिल पाल, चमलेख गार्जिया की गायत्री बसेड़ा, खोलियागांव की अंकिता पाल, रसगाड़ी की रेखा धामी, जमतड़ी बाजार के मुकेश महर, क्षेत्र पंचायत सदस्य कमला पाल और गोपाल गोपी सहित नरेंद्र बसेड़ा, मन्नू लंठी, महेश पाल, जय सिंह बसेड़ा, हरीश पाल, आनंद कुंवर, हरीश पंत, आन सिंह, राजेश चंद, विजय भंडारी, भवान सिंह, अर्जुन पाल और अर्जुन धामी समेत अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीण एकता मंच और अस्कोट विकास संघर्ष समिति ने अभियान में सहयोग देने वाले सभी ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें शासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समयसीमा के भीतर मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन तेज होने की संभावना है।


