कनालीछीना, पिथौरागढ़। कनालीछीना क्षेत्र के बजैत गांव में जंगली सूअरों के बढ़ते आतंक से किसान परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खेती-बाड़ी से अपनी आजीविका चलाने के लिए वे खेतों में अदरक, हल्दी समेत फल-सब्जियों की फसलें तैयार कर रहे हैं, लेकिन जंगली सूअर उनकी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं।
किसानों के मुताबिक खेत में अदरक, हल्दी अथवा अन्य फसल लगाने के बाद जैसे ही पौधे निकलते हैं, जंगली सूअर खेतों में घुसकर उन्हें खोदकर उखाड़ देते हैं। कई बार पूरी क्यारी तहस-नहस हो जाती है। इससे किसानों को बीज, खाद, मजदूरी और मेहनत की लागत तक वापस नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों से फसल बचाने के लिए वे तमाम उपाय आजमा चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। रात-दिन खेतों की रखवाली करने के बावजूद सूअर खेतों में पहुंच जाते हैं।
किसानों का कहना है कि पहाड़ों में सीमित संसाधनों के बीच फल और सब्जियों की खेती उनके लिए रोजगार और आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। यदि इसी तरह फसलें नष्ट होती रहीं तो किसानों के सामने खेती छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब वन्यजीवों के कारण खेती करना मुश्किल हो रहा है तो फसल नुकसान की भरपाई कौन करेगा? किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कराने, जंगली सूअरों से फसलों की सुरक्षा के प्रभावी उपाय करने तथा नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
पिथौरागढ़ के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी जंगली सूअरों और बंदरों के कारण फसल एवं बागवानी को नुकसान की शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में रामगंगा घाटी के कई गांवों के किसानों ने भी जंगली जानवरों द्वारा फसलें नष्ट किए जाने की समस्या उठाई थी।
अब बजैत गांव के किसानों की मांग है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई के बजाय धरातल पर ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि वे भयमुक्त होकर खेती कर सकें और अपनी आजीविका बचा सकें।


