पिथौरागढ़।

धारचूला विकासखंड के पीएम श्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जारा-जिबली के उच्चीकरण की मांग को लेकर चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन अब नए चरण में पहुंच गया है। गुरुवार को धरना स्थल से ग्रामीणों का एक दल पारंपरिक ढोल-नगाड़े और भंकोर लेकर तथा मुंह पर काली पट्टी बांधकर कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचा। ग्रामीणों ने पूरे परिसर की परिक्रमा करते हुए मौन विरोध दर्ज कराया और उसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय के सामने पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाकर अपनी मांगों की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी पुनः धरना स्थल लौट गए।

ग्रामीणों का कहना है कि वे अप्रैल माह से लगातार शासन और प्रशासन के समक्ष विद्यालय के उच्चीकरण की मांग उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि सीमांत क्षेत्र में शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने और पलायन जैसी गंभीर समस्या को रोकने के लिए विद्यालय का उच्चीकरण अत्यंत आवश्यक है। इसके बावजूद उनकी मांग लगातार अनसुनी की जा रही है।

आंदोलनकारियों ने कहा कि जारा-जिबली और आसपास के गांवों के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए दूरस्थ विद्यालयों का रुख करना पड़ता है। सीमित आय वाले परिवारों के लिए प्रतिदिन आने-जाने का खर्च वहन करना संभव नहीं है, जबकि कई बच्चों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। इसका सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है।

आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। पिछले दिनों उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। वहीं बुधवार को पिथौरागढ़ विधायक मयूख महर भी धरना स्थल पहुंचे और आंदोलनकारियों के साथ एकजुटता जताई।

इस दौरान विधायक मयूख महर ने कहा कि "जारा-जिबली के ग्रामीणों का मेरे ऊपर एहसान है। आज उसे चुकाने का समय आ गया है। यदि सरकार ने शीघ्र उनकी मांग पूरी नहीं की तो मैं स्वयं भी उनके साथ आमरण अनशन पर बैठूंगा।"

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक विद्यालय का उच्चीकरण नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन और आमरण अनशन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह केवल एक विद्यालय का मुद्दा नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र के बच्चों के भविष्य और शिक्षा के अधिकार की लड़ाई है।

पाठकों से सवाल जब सीमांत क्षेत्र के बच्चे आज भी इंटरमीडिएट शिक्षा के लिए 10–20 किलोमीटर की दूरी तय करने को मजबूर हों, तो क्या ऐसे क्षेत्रों में विद्यालयों का उच्चीकरण सरकार की प्राथमिकता नहीं होना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।

— VANI NEWS