नई दिल्ली/पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी वरिष्ठ साहित्यकार एवं समाजसेवी डॉ. पीतांबर अवस्थी को उनके साहित्यिक योगदान, सामाजिक सरोकारों तथा लोकभाषा, लोककला और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए 12वां लोक भाषा, लोक कला, लोक संस्कृति संरक्षण सम्मान प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान मासिक साहित्यिक संगोष्ठी (दिल्ली) द्वारा आयोजित भाषायी, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम में दिया जाएगा।
“हजार ग्राम हजार धाम, हमारी भाषा हमारी पहचान” की थीम पर आयोजित यह त्रिवेणी समागम शनिवार, 12 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक डीपीएसएमआई सभागार, बी-20, न्यू अशोक नगर, दिल्ली में आयोजित होगा। कार्यक्रम में मासिक साहित्य सम्मान, साहित्यिक संगोष्ठी और बहुभाषा कवि सम्मेलन (नंबर-22) भी आयोजित किया जाएगा। आयोजन स्थल न्यू अशोक नगर मेट्रो स्टेशन के निकट है।
साहित्य के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़ा लंबा सफर डॉ. पीतांबर अवस्थी का साहित्यिक और सामाजिक जीवन बहुआयामी रहा है। उपलब्ध परिचय के अनुसार वे श्रीमती हेमंती अवस्थी (हरूली आमा) और पंडित जयदेव अवस्थी ज्योतिषाचार्य के सुपुत्र हैं। उन्होंने कोविद, साहित्याचार्य, योगाचार्य, आयुर्वेदाचार्य सहित एम.ए. हिंदी, संस्कृत, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, डी.पी.एड. और पी-एच.डी. जैसी उच्च शिक्षाएं प्राप्त की हैं।
उन्होंने पिथौरागढ़ में ‘ज्ञान प्रकाश संस्कृत पुस्तकालय’ की स्थापना की। इसके माध्यम से वे अध्ययन-अध्यापन और साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े रहे। उनका लेखन सामाजिक कुरीतियों और जनजागरूकता के विषयों पर केंद्रित रहा है। नशामुक्ति, अंधविश्वास और रूढ़िवादिता को दूर करने, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, जल संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर उन्होंने विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शोधपरक लेख लिखे हैं।
साहित्य की कई विधाओं में उल्लेखनीय योगदान डॉ. अवस्थी की रचनाओं में कविता, खंडकाव्य, सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण, संस्कृति और लोकजीवन से जुड़े विषय प्रमुख हैं। उनके प्रमुख कृतित्व में ‘परछाई’ (काव्य-संग्रह), ‘पंचप्रिया’ (खंड काव्य), ‘रोगनाशी-जड़ी-बूटियां’, ‘बोध कथा’, ‘मंजुल’ (काव्य-संग्रह), ‘जिंदगी जरूरी है’ (मद्य-निषेध), ‘बेटियां’, ‘अभियान एक दस्तावेज’, ‘हिमालय’, ‘मासिक धर्म अपवित्र क्यों?’, ‘उत्तराखंड के परंपरागत जलस्रोत’, ‘रूवतन्म नियकर्म पद्धति’, ‘पिताश्री के प्रिय भजन’, ‘राजयोग-दर्शन’, ‘संगीत एवं संस्कृति’, ‘जागर’, ‘होली गीत’, ‘उत्तराखंड के जागर एवं मंत्र’ और ‘नशे पर प्रहार’ जैसी रचनाएं शामिल हैं।
उनकी लेखनी केवल साहित्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने समाज में जागरूकता पैदा करने को भी अपने लेखन का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया।
नशामुक्ति और पर्यावरण के क्षेत्र में भी सक्रिय डॉ. अवस्थी ने नशामुक्ति अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों और विद्यालयों में जनजागरूकता फैलाने का कार्य किया। उल्लेख के अनुसार वर्ष 2006 में एक लाख लोगों से नशा और मांसाहार न करने का संकल्प पत्र भरवाने के अभियान से भी वे जुड़े रहे। उत्तराखंड को नशामुक्त राज्य बनाने की दिशा में भी उन्होंने लगातार प्रयास किए।
पर्यावरण संरक्षण, पशु-पक्षी संरक्षण, जल संरक्षण, शाकाहार, नैतिकता, देशभक्ति और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए भी उनके प्रयासों का उल्लेख मिलता है। विद्यालयों में करुणा क्लब गठित कर विद्यार्थियों में प्राणीमात्र के प्रति प्रेम, अहिंसा और दया की भावना विकसित करने का प्रयास भी उन्होंने किया।
‘हरूली आमा’ छात्रवृत्ति योजना से बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन डॉ. अवस्थी ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपनी माताजी के नाम पर ‘हरूली आमा’ छात्रवृत्ति योजना शुरू की। उनके सामाजिक कार्यों में किशोरी शिक्षा और भ्रूण हत्या रोकने के लिए जनजागरूकता अभियान भी शामिल रहे हैं।
कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त कर चुके हैं डॉ. अवस्थी को शिक्षा, साहित्य, समाजसेवा, पर्यावरण और जनजागरूकता के क्षेत्र में विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उपलब्ध विवरण में शिक्षा विभाग उत्तराखंड सरकार का ‘शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक सम्मान’, ‘उत्तराखंड रत्न’ मानद उपाधि, ‘फेस ऑफ इंडिया अवार्ड 2022’, ‘साहित्य प्रभा सर्वोच्च ज्ञान माला’, ‘शिक्षा एवं समाज सेवा सम्मान’, ‘साहित्य वैभव सम्मान’, ‘राष्ट्र गौरव’, ‘पर्वत रत्न’, ‘विद्यासागर मानद’ उपाधि, ‘विद्या वारिधि’ मानद उपाधि, ‘सरस्वती रत्न’, ‘पर्यावरणश्री’, ‘हिंदी गौरव’, ‘श्रीगुमानी पंत साहित्य सेवा सम्मान’, ‘शिक्षकश्री’, ‘मानव रत्न’, ‘विवेकानंद सम्मान’, ‘समाजश्री’, ‘काव्यश्री’, ‘जय जगत केसरी रत्न’, ‘साहित्य सम्राट’, ‘शिक्षण संवर्धन सम्मान’, ‘बाल साहित्य सेवी’, ‘समाज रत्न’, ‘बाल साहित्य गौरव’, ‘बाल सृजनश्री’, ‘भारती रत्न’ और ‘भारत गौरव’ सहित अनेक सम्मान एवं प्रशस्ति-पत्र शामिल हैं।
ऐसे बहुआयामी साहित्यकार और समाजसेवी डॉ. पीतांबर अवस्थी को दिल्ली में दिया जा रहा 12वां लोक भाषा, लोक कला, लोक संस्कृति संरक्षण सम्मान उनके लंबे साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान की एक और महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।
कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों और विभिन्न भाषाओं से जुड़े रचनाकारों की भागीदारी रहेगी। त्रिवेणी समागम के माध्यम से लोकभाषा, लोककला और लोकसंस्कृति को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया जाएगा।
_ कपिल भट्ट वाणी न्यूज


