पिथौरागढ़। उत्तराखंड शासन ने नगर निगम पिथौरागढ़ में छह नामित सदस्यों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी कर दी है। यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 (उत्तराखंड में यथावत लागू) की धारा 6 के तहत की गई है। अधिसूचना में छह व्यक्तियों को नगर निगम का नामित सदस्य बनाया गया है, जिससे नगर निगम की संरचना अब और विस्तृत हो गई है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम में नामित सदस्य बनाए गए हैं, लेकिन हर बार इन नियुक्तियों के साथ यह सवाल उठता है कि आखिर इनका चयन किन मानकों पर होता है और इनकी भूमिका क्या होती है।

क्या होते हैं नामित सदस्य?

नगर निगम में अधिकांश सदस्य जनता द्वारा चुने हुए पार्षद होते हैं, जबकि कुछ सदस्यों को राज्य सरकार सीधे मनोनीत करती है। इन्हें नामित सदस्य (Nominated Members) कहा जाता है। इनका उद्देश्य नगर प्रशासन में ऐसे लोगों का अनुभव शामिल करना है जो समाज सेवा, शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार, पर्यावरण, कानून या अन्य सार्वजनिक क्षेत्रों में योगदान रखते हों।

चयन का आधार क्या है?

कानून के अनुसार राज्य सरकार ऐसे व्यक्तियों को नामित कर सकती है जिन्हें नगर प्रशासन या सार्वजनिक जीवन का विशेष अनुभव या ज्ञान हो। हालांकि अधिसूचना में यह उल्लेख नहीं किया गया है कि संबंधित छह व्यक्तियों का चयन किन विशिष्ट मानकों के आधार पर किया गया है।

यही कारण है कि कई बार विपक्ष और सामाजिक संगठन यह मांग उठाते रहे हैं कि सरकार नामित सदस्यों के चयन की प्रक्रिया और मानदंड सार्वजनिक करे, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

क्या हैं अधिकार?

नामित सदस्य नगर निगम की बैठकों में भाग लेते हैं, विभिन्न विकास योजनाओं पर अपनी राय रखते हैं और समितियों में भी शामिल किए जा सकते हैं। वर्तमान कानूनी व्यवस्था के अनुसार उन्हें नगर निगम की बैठकों में मतदान का अधिकार भी प्राप्त है। हालांकि वे सीधे जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं होते।

क्या मिलता है लाभ?

नामित सदस्यों को सामान्यतः नियमित वेतन नहीं मिलता, लेकिन निगम के नियमों के अनुसार बैठक भत्ता और अन्य निर्धारित सुविधाएं मिल सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय शहरी निकायों के जानकारों का मानना है कि यदि नामित सदस्यों का चयन वास्तव में विशेषज्ञता और समाज सेवा के आधार पर हो तो इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली मजबूत होती है। वहीं यदि चयन केवल राजनीतिक आधार पर हो, तो इसका मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

पिथौरागढ़ के लिए क्या मायने?

नगर निगम पिथौरागढ़ अभी विकास की कई चुनौतियों से जूझ रहा है। स्वच्छता, यातायात, पेयजल, पार्किंग, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी विस्तार जैसे मुद्दों पर नगर निगम को प्रभावी निर्णय लेने होंगे। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नव-नामित सदस्य इन विषयों पर कितनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

(विश्लेषण)

नामित सदस्यों की नियुक्ति पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। सरकार यदि चयन के मानदंड और सदस्यों की विशेषज्ञता सार्वजनिक करे तो इससे नागरिकों का विश्वास और अधिक मजबूत हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि ये छह नामित सदस्य पिथौरागढ़ के शहरी विकास में कितनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं।