देहरादून। टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड जल संस्थान एवं पेयजल निगम में आउटसोर्स और ठेका प्रणाली के माध्यम से पिछले 25 से 30 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। कर्मचारियों के संगठन का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर मांग उठाने के बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है।

संगठन द्वारा मुख्यमंत्री, पेयजल मंत्री एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि विभाग में वर्षों से कार्यरत अनेक कर्मचारी अभी भी आउटसोर्स और ठेका व्यवस्था के तहत कार्य कर रहे हैं। संगठन का दावा है कि वर्तमान में कई कर्मचारियों को ₹10,000 से ₹12,000 प्रतिमाह तक का वेतन मिल रहा है, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो रहा है।

कर्मचारियों की दो प्रमुख मांगों में लंबे समय से कार्यरत कर्मियों का नियमितीकरण तथा 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के सिद्धांत के अनुरूप वेतन दिए जाने की मांग शामिल है। संगठन का कहना है कि कोविड-19 जैसी आपदा के दौरान भी इन कर्मचारियों ने पेयजल आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

संगठन द्वारा जारी पत्र के अनुसार यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया जाता है तो 6 जुलाई 2026 से मुख्यालय गोरसाली, देहरादून में अनिश्चितकालीन आंदोलन, कार्य बहिष्कार और संघर्ष कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। संगठन ने यह भी कहा है कि आंदोलन के कारण यदि पेयजल व्यवस्था प्रभावित होती है तो इसकी जिम्मेदारी विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।

इधर, गढ़वाल मंडल आयुक्त कार्यालय की ओर से भी संबंधित प्रकरण में पत्र जारी कर गढ़वाल मंडल के सभी जिलाधिकारियों को कर्मचारी संगठन के ज्ञापन का संज्ञान लेते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने तथा की गई कार्रवाई से संबंधित पक्ष को अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।

फिलहाल इस मामले में सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब कर्मचारियों के प्रस्तावित आंदोलन और शासन स्तर पर होने वाले निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।