पिथौरागढ़। विकासखंड कनालीछीना के ग्राम बस्तड़ी में सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा को इस वर्ष सकारात्मक बदलाव और सामूहिक सहभागिता के साथ आगे बढ़ाया गया। गांव में कलश यात्रा के साथ नवरात्र पूजा का शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में ग्रामीण महिलाओं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर आस्था, एकता और भाईचारे का संदेश दिया।
नवरात्र पूजा के शुभारंभ पर ग्रामीण महिलाएं कलश लेकर गांव के सार्वजनिक आंगन में एकत्रित हुईं। यहां से ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच भव्य कलश यात्रा धनलेख मंदिर की ओर रवाना हुई। मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पूरे आयोजन में ग्रामीणों का उत्साह और सामूहिक सहभागिता देखने को मिली ।
नवरात्र के नौ दिनों तक गांव के चयनित ग्रामीण श्री तारा दत्त भट्ट, श्री खेमा नंद भट्ट, श्री कृष्ण नंद भट्ट, श्री बसंत भट्ट, श्री केशव दत्त भट्ट,श्री विशन दत्त भट्ट और श्री रेवाधर भट्ट के साथ पंडित विजय ओझा मंदिर में रहकर पूजा-अर्चना करेंगे। इस दौरान गांव और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलकामना के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।
नवमी के दिन हवन, दशमी की रात्रि जागरण और एकादशी को भव्य मेले के साथ नवरात्र पूजन का समापन होगा। इस वर्ष तिथियों के दो दिन पड़ने के कारण मेला 22 अक्टूबर को आयोजित किया जाना सुनिश्चित किया गया है।
इस आयोजन की विशेषता केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से गांव में आपसी मेल-मिलाप, सहयोग और सामाजिक एकता को भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम प्रधान मंजू भट्ट और कृष्ण चंद्र भट्ट की सकारात्मक सोच से गांव में इस तरह के नवाचार किए जा रहे हैं, ताकि मोबाइल फोन के बढ़ते चलन के बीच लोग आपस में संवाद करें, एक-दूसरे के करीब आएं और मिल-जुलकर सामूहिक कार्यों को आगे बढ़ाएं।
ग्राम प्रधान मंजू भट्ट ने आयोजन में भरपूर सहयोग देने के लिए समस्त ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी अच्छी सोच को धरातल पर उतारना जनता के सहयोग के बिना संभव नहीं है। ग्रामीणों की सहभागिता ही गांव की परंपराओं को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने की सबसे बड़ी ताकत है।
ग्राम बस्तड़ी की यह पहल बताती है कि परंपराओं को सहेजते हुए सकारात्मक बदलाव भी किए जा सकते हैं। जब गांव के लोग किसी साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होते हैं, तो धार्मिक आयोजन सामाजिक सद्भाव और सामूहिक विकास का माध्यम बन जाते हैं।
आज के डिजिटल दौर में बस्तड़ी गांव की यह पहल संदेश देती है कि तकनीक के साथ कदम मिलाना जरूरी है, लेकिन आपसी प्रेम, भाईचारा और सामूहिकता की डोर को मजबूत बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


