पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इस वर्ष लगातार बारिश ने छोटे और सीमांत काश्तकारों की कमर तोड़ दी है। खासतौर पर शिमला मिर्च, टमाटर, ककड़ी और कद्दू जैसी नकदी सब्जियों का कारोबार मौसम की मार से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश से खेतों में फसल खराब होने के साथ ही कई क्षेत्रों में किसानों को तैयार उपज का उचित बाजार भी नहीं मिल पा रहा है। हालिया बारिश से फसलों को नुकसान और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी किसान प्रशासन से सर्वे की मांग कर चुके हैं।
भाजपा नेता सुरेश जोशी ने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेती करने वाले अधिकांश छोटे काश्तकार अपनी सीमित जमीन और संसाधनों के भरोसे सब्जियों का उत्पादन करते हैं। ऐसे में फसल खराब होना उनके लिए सिर्फ कृषि नुकसान नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक व्यवस्था पर सीधा असर है।
जोशी के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छोटे काश्तकारों को राहत देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ऐसी विशेष कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए, जिससे प्राकृतिक आपदा से प्रभावित छोटे किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
सुरेश जोशी ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों का जमीनी स्तर पर निष्पक्ष सर्वे कराया जाना चाहिए और नुकसान के आधार पर किसानों को राहत उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में मौसम की ऐसी मार से किसानों को बचाने के लिए फसल बीमा, संरक्षित खेती, बेहतर बाजार व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर भंडारण जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की जरूरत है।
उत्तराखंड में लगातार बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें भी प्रभावित हुई हैं, जिसका सीधा असर पर्वतीय किसानों की नकदी फसलों को बाजार तक पहुंचाने पर पड़ता है।
जोशी ने कहा कि छोटे काश्तकार पहाड़ की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए बारिश से हुए नुकसान को सामान्य कृषि नुकसान मानकर नजरअंदाज करने के बजाय इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल राहत और दीर्घकालीन कार्ययोजना पर काम किया जाना चाहिए। - vani news


