पिथौरागढ़/बंगापानी। ग्राम पंचायत सिरतोला में आपदा प्रभावित परिवारों के विस्थापन को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार को तहसील प्रशासन बंगापानी के अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ गांव में नाप-जोख के लिए पहुंचे तो ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि विस्थापन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय लोगों की समस्याओं और आपत्तियों का समाधान किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार सिरतोला क्षेत्र में पहले से विस्थापित परिवारों को बसाया गया है, लेकिन उनके लिए पेयजल और पैदल मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाई है। इससे स्थानीय ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले दिए गए ज्ञापन में भी इन समस्याओं और पुराने विस्थापित परिवारों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि नए विस्थापन से पहले स्थानीय ग्रामीणों के साथ पर्याप्त बैठक और परामर्श नहीं किया गया। उनका कहना है कि पूर्व में प्रशासन के साथ हुई बैठकों में समस्याओं और आपत्तियों को सामने रखा गया था, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। बुधवार को हुई बैठक में भी ग्रामीणों ने इन्हीं मुद्दों को दोहराते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई।
पशुपालन को लेकर भी ग्रामीणों ने जताई चिंता ग्रामीणों के अनुसार प्रस्तावित विस्थापित परिवारों में कई परिवार पशुपालन से जुड़े हैं। ग्रामीणों की चिंता है कि यदि इन परिवारों को सिरतोला ग्राम पंचायत क्षेत्र में बसाया जाता है तो उनके पशुओं के लिए चारा और जलावन लकड़ी सहित अन्य प्राकृतिक संसाधनों की आवश्यकता बढ़ेगी। ऐसी स्थिति में विस्थापित परिवारों की जरूरतें स्थानीय जल, जंगल और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हो सकती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सिरतोला ग्राम पंचायत के संसाधन पहले से ही सीमित हैं। ऐसे में आबादी और पशुधन का अतिरिक्त दबाव बढ़ने पर जल एवं वन संसाधनों के उपयोग को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और विस्थापित परिवारों के बीच भविष्य में आपसी संघर्ष की स्थिति पैदा होने की आशंका है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन इस संभावित समस्या का भी पहले से आकलन करे और ऐसा पुनर्वास स्थल चुने जहां प्रभावित परिवारों के लिए आवश्यक संसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था हो।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सिरतोला ग्राम पंचायत के कई क्षेत्र पहले से ही आपदा की दृष्टि से संवेदनशील हैं। पूर्व में 2013 और 2018 में विस्थापित किए गए परिवारों को लेकर भी सुविधाओं का सवाल उठाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पहले से विस्थापित परिवारों की मूलभूत समस्याएं पूरी तरह हल नहीं हुई हैं, तो नए विस्थापन से पहले प्रशासन को उन समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि भविष्य में सिरतोला ग्राम पंचायत क्षेत्र में नए विस्थापन की कार्रवाई न की जाए और यदि आपदा प्रभावित परिवारों का पुनर्वास जरूरी है तो उनके लिए ग्राम पंचायत की क्षमता, उपलब्ध संसाधनों, जल-जंगल और मूलभूत सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अन्य उपयुक्त स्थान तलाशा जाए।
ग्रामीणों ने इस संबंध में प्रशासन को पुनः ज्ञापन सौंपकर विस्थापन पर रोक लगाने की मांग की है। इससे साफ है कि मामला अब केवल एक बार की आपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण लगातार अपनी मांग प्रशासन के सामने रख रहे हैं। पूर्व में भी ग्राम पंचायत की ओर से विस्थापन से पहले स्थानीय स्तर पर विचार-विमर्श और समस्याओं के समाधान की मांग की जा चुकी है।
ग्रामीणों का सवाल—क्या केवल जमीन उपलब्ध करा देना ही पुनर्वास है?
ग्रामीणों की आपत्ति के बीच सरकार और प्रशासन के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है—क्या आपदा प्रभावित परिवारों को केवल जमीन उपलब्ध कराकर वहां भेज देना ही विस्थापन और पुनर्वास की पूरी जिम्मेदारी है?
यदि किसी परिवार को उसके मूल निवास से विस्थापित किया जा रहा है तो उसके लिए सुरक्षित आवासीय स्थान के साथ पेयजल, रास्ता, सड़क, बिजली, स्वच्छता, पशुओं के लिए चारा तथा अन्य जरूरी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी पुनर्वास की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। इन सुविधाओं की वास्तविक उपलब्धता और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्धारण संबंधित सरकारी नियमों और स्वीकृत पुनर्वास योजना के अनुसार किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले से विस्थापित परिवारों की समस्याओं का समाधान किए बिना नए परिवारों को बसाने की कोशिश से समस्या और बढ़ सकती है। उनका कहना है कि सरकार को केवल विस्थापित परिवारों के लिए जमीन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थायी और सुविधायुक्त पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए।
सरकार से ग्रामीणों की मांग ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि— सिरतोला में प्रस्तावित नए विस्थापन की कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए।
किसी भी विस्थापन से पहले स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम पंचायत से समुचित परामर्श किया जाए।
पहले से विस्थापित परिवारों के लिए पेयजल और पैदल मार्ग सहित मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
आपदा प्रभावित परिवारों के लिए ऐसा स्थान चुना जाए जहां पर्याप्त जमीन, पेयजल, सड़क, रास्ता और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों।
विस्थापित परिवारों के पशुपालन और चारा-लकड़ी की जरूरतों का भी पुनर्वास योजना बनाते समय आकलन किया जाए।
जल, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ने वाले दबाव का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आकलन किया जाए।
पुराने विस्थापन से जुड़ी समस्याओं का स्थलीय निरीक्षण कर समाधान किया जाए।
ग्रामीणों की आपत्तियों और पूर्व बैठकों में हुई बातचीत को रिकॉर्ड में लेकर उस पर स्पष्ट निर्णय किया जाए।
भविष्य में किसी भी विस्थापन की कार्रवाई पारदर्शी प्रक्रिया और स्थानीय लोगों से संवाद के बाद ही की जाए।
सिरतोला में आज का विरोध इस बात का संकेत है कि आपदा प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान देना जरूरी है, लेकिन पुनर्वास की प्रक्रिया में स्थानीय ग्रामीणों की समस्याओं, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य में पैदा होने वाली संभावित परिस्थितियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब बड़ा सवाल सरकार और प्रशासन के सामने है—क्या पुनर्वास सिर्फ जमीन उपलब्ध कराने तक सीमित रहेगा, या विस्थापित परिवारों के साथ-साथ उस क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों के जल, जंगल, रास्ते और अन्य संसाधनों से जुड़े हितों को ध्यान में रखते हुए कोई व्यापक पुनर्वास योजना तैयार की जाएगी? सिरतोला के ग्रामीण अब सरकार से इसी सवाल का स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
_प्रकाश गोस्वामी, बंगापानी


