नई दिल्ली। PIB प्रधानमंत्री के "कैच द रेन – जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो" अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने अमृत 2.0 के तहत देशभर में जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और जल निकायों के पुनर्जीवन से जुड़े व्यापक कार्यों को तेज कर दिया है। इस राष्ट्रव्यापी पहल का उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए देश को जल संकट से सुरक्षित बनाना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने की क्षमता विकसित करना है।
अमृत 2.0 के अंतर्गत 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 900 शहरी स्थानीय निकाय इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। विभिन्न शहरों में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा दीर्घकालिक जल प्रबंधन से जुड़े नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जल शक्ति अभियान–जन भागीदारी (जेएसजेबी) 2.0 के तहत जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से 79 नगर निगमों में 1,99,278 भूजल पुनर्भरण संरचनाओं पर कार्य शुरू किया गया है, जबकि 738 शहरी स्थानीय निकायों में 73,036 पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन जारी है। इससे शहरी क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने और जल संरक्षण को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
अमृत 2.0 के अंतर्गत संचालित उथले जलभृत प्रबंधन (एसएएम) कार्यक्रम के माध्यम से वैज्ञानिक जलभृत मानचित्रण और लक्षित हस्तक्षेप किए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल के बर्दवान और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में इंजेक्शन बोरवेल युक्त रिचार्ज पिट के जरिए वर्षा जल को गहरे जलभृतों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं ईटानगर में छत आधारित वर्षा जल संचयन प्रणाली के साथ भंडारण टैंक विकसित किए गए हैं। कोरबा (छत्तीसगढ़) और वारंगल (तेलंगाना) में मानसून से पहले ही भूजल पुनर्भरण संरचनाओं को संचालित कर वर्षा जल के अधिकतम संचयन की तैयारी पूरी कर ली गई है।
जल निकाय पुनर्जीवन (डब्ल्यूबीआर) घटक के तहत देशभर में लगभग 1.21 लाख एकड़ क्षेत्रफल के जल निकायों का पुनर्जीवन किया जा रहा है। इस परियोजना में गाद हटाने, इनलेट-आउटलेट सुधार, तट संरक्षण, हरित विकास और जैव विविधता संरक्षण जैसे कार्य शामिल हैं, जिससे जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के साथ शहरी बाढ़ की समस्या से निपटने में भी मदद मिलेगी।
इसके साथ ही शहरी भारत में 1,800 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में पार्कों और हरित क्षेत्रों का विकास भी किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से पर्यावरण संरक्षण, भूजल पुनर्भरण, शहरी तापमान में कमी तथा नागरिकों के लिए बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का कहना है कि इन पहलों के माध्यम से "कैच द रेन – जहाँ वर्षा हो, जब वर्षा हो" अभियान को जनभागीदारी के साथ मजबूत किया जा रहा है, ताकि हर वर्षा की बूंद को संरक्षित कर भविष्य की जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मुख्य बिंदु 27 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 900 शहरी निकाय अभियान से जुड़े।
1.99 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाओं पर कार्य प्रारंभ।
73 हजार से अधिक नई पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण जारी।
1.21 लाख एकड़ जल निकायों का पुनर्जीवन।
1,800 एकड़ से अधिक हरित क्षेत्र और पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण से जल सुरक्षा को मिलेगी मजबूती।
"आज बचाई गई हर बूंद, आने वाली पीढ़ियों की जल सुरक्षा में किया गया एक महत्वपूर्ण निवेश है।"


