पिथौरागढ़ | 9 अगस्त 2026 पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र बलुवाकोट के लेक गांव में जंगल से निकलकर एक मॉनिटर लिजर्ड (गोह) अचानक गांव में पहुंच गई। उसका सिर एक डिब्बे में बुरी तरह फंस गया था। काफी देर तक छटपटाने के बाद भी जब वह डिब्बे से बाहर नहीं निकल सकी तो उसकी जान पर बन आई।

इसी दौरान गांव के प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका और कुशल पर्वतारोही जावंती पाण्डेय ‘जया’ ने स्थानीय युवक भाष्कर के साथ मिलकर गोह को बचाने का निर्णय लिया। दोनों ने बेहद सावधानी और साहस के साथ उसके सिर में फंसे डिब्बे को अलग किया और मॉनिटर लिजर्ड की जान बचा ली।

स्थानीय लोग मॉनिटर लिजर्ड को ‘ग्वाण’ के नाम से जानते हैं और इसे खतरनाक वन्यजीव मानते हैं। ऐसे में उसके बेहद करीब जाकर रेस्क्यू करना जोखिम भरा था, लेकिन जया पाण्डेय ने वन्यजीव के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए बिना डरे रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

जावंती पाण्डेय पिछले तीन दशक से अधिक समय से अध्यापन के साथ साहसिक खेलों को बढ़ावा दे रही हैं। कोविड महामारी के पहले चरण में 6 दिसंबर 2020 को उन्होंने 148 मीटर ऊंचे बिरथी जलप्रपात से उतरकर कीर्तिमान बनाया था। उनके इस साहसिक अभियान को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।

जया पाण्डेय इंट्रिसिक क्लाइंबर्स एंड एक्सप्लोरर्स (ICE) की संस्थापक भी हैं। वह अब तक सैकड़ों युवक-युवतियों को साहसिक खेलों का प्रशिक्षण दे चुकी हैं।

गोह के रेस्क्यू की यह घटना एक बार फिर बताती है कि साहस के साथ वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी है। जया पाण्डेय और भाष्कर के इस प्रयास की स्थानीय लोगों ने सराहना की है।

— जगदीश कलौनी, पिथौरागढ़