चमोली/पीपलकोटी। विष्णुगाड–पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद मजदूरों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। हादसे के बाद परियोजना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए मजदूरों ने प्रदर्शन किया और कहा कि सुरक्षा ऑडिट हादसा होने के बाद नहीं, बल्कि हादसे से पहले होना चाहिए।

मजदूरों का कहना है कि घटना से पहले ही टनल के भीतर खतरे की आशंका को लेकर साथी कर्मचारियों ने चेतावनी दी थी। मजदूरों के अनुसार, जब उन्होंने खतरे की बात उठाई तो कथित तौर पर उन्हें यह कहकर काम जारी रखने को कहा गया कि “तुम लोग जाओ, कुछ नहीं होगा।” मजदूरों का आरोप है कि उनकी आशंकाओं को गंभीरता से लिया जाता तो शायद इस दर्दनाक हादसे को टाला जा सकता था।

“पहले चेतावनी दी थी, लेकिन गंभीरता से नहीं लिया”

प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने कहा कि टनल में काम करने वाले कर्मचारियों को जमीन और सुरंग की परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव होता है। यदि कोई मजदूर खतरे की आशंका व्यक्त करता है तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल तकनीकी जांच और सुरक्षा परीक्षण कराया जाना चाहिए।

मजदूरों का सवाल है कि आखिर सुरक्षा ऑडिट किसी हादसे के बाद ही क्यों याद आता है? उनका कहना है कि निर्माणाधीन सभी टनलों में नियमित और अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना का पहले ही पता लगाया जा सके।

मजदूरों की प्रमुख मांगें प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने मृतकों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग रखी। इसके साथ ही उनकी मांग है कि मृतक मजदूरों के बच्चों की शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी कंपनी उठाए।

मजदूरों ने यह भी मांग की कि विष्णुगाड–पीपलकोटी परियोजना की सभी टनलों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और जब तक सुरक्षा मानकों को पूरी तरह सुनिश्चित न कर लिया जाए, तब तक निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं किया जाए।

मंत्री मदन कौशिक बोले—मजदूरों की मांग जायज मामले को लेकर आपदा मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि मजदूरों की मांग जायज है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक सुरक्षा मानक पूरे नहीं हो जाते, तब तक काम शुरू नहीं किया जाए।

मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की ओर से तत्काल राहत राशि के रूप में 4 लाख रुपये दिए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार मृतकों के परिवारों को अधिक से अधिक मुआवजा दिलाने का प्रयास करेगी।

सिर्फ मुआवजा नहीं, जवाबदेही भी जरूरी हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही का है। मजदूरों का कहना है कि यदि पहले से खतरे की सूचना थी तो उसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया? सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन कर रहा था और नियमित सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?

टनल में हुए हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड की बड़ी निर्माण एवं जलविद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत भी सामने आई है।

अगर खतरे की चेतावनी हादसे से पहले मिल गई थी, तो उसे गंभीरता से लेने के लिए किसी मजदूर की जान जाना क्यों जरूरी था?

अब जरूरत केवल हादसे के बाद राहत और मुआवजे की नहीं, बल्कि हादसे से पहले सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था बनाने की है। _ vaninews