पिथौरागढ़ में सड़कों की बदहाली को लेकर प्रशासन भले ही लगातार सख्त निर्देश दे रहा हो, लेकिन जमीनी तस्वीर सवाल खड़े कर रही है। जिलाधिकारी द्वारा हाल ही में अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि खराब मौसम का बहाना बनाकर जिम्मेदारी से बचने के बजाय सड़कों की नियमित मरम्मत और गड्ढामुक्ति की जाए, लेकिन इसके बावजूद कई सड़कें आज भी जल निकासी और सुरक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रही हैं।
ऐसी ही तस्वीर उर्ग से ग्राम जीवी, घुनसेरा, मढ़ खड़ायत होते हुए सिलोली, डॉन बॉस्को, बेस हॉस्पिटल और RTO को जोड़ने वाली सड़क की सामने आई है। UKD के जिला महामंत्री पिथौरागढ़ कमल सिंह चंद के मुताबिक यह सड़क वर्ष 2011 में बनाई गई थी, लेकिन शुरुआत से ही इसके निर्माण को लेकर सवाल रहे हैं। उनका आरोप है कि सड़क को समुचित सर्वे के बिना रात में काट दिया गया, जिसके चलते जल निकासी की समस्या शुरुआत से ही बनी रही।
समय के साथ सड़क पर दो से तीन बार डामरीकरण भी किया जा चुका है, लेकिन नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़क पर बहता है और सड़क बार-बार खराब हो जाती है।
कमल सिंह चंद का कहना है कि स्थानीय लोगों ने PWD से सड़क के किनारे नालियां और उचित जल निकासी व्यवस्था बनाने की मांग की थी। इसके बाद कुछ स्थानों पर कच्ची नालियां बनाई गईं, लेकिन सड़क के उन हिस्सों में जहां जलभराव और पानी के बहाव की समस्या ज्यादा गंभीर है, वहां आज भी नाली की व्यवस्था नहीं है।
यही सवाल सड़क की टिकाऊपन पर भी खड़ा होता है—जब पानी की निकासी का इंतजाम ही नहीं होगा तो बार-बार किया जाने वाला डामरीकरण आखिर कितने दिन टिकेगा?
सड़क पर बने पहले पुल की सुरक्षा व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पुल की दोनों ओर लगी सुरक्षा बैरीकेडिंग टूट चुकी है, जिससे यहां दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।
सड़क के प्रारंभ में अमर शहीद और शौर्य चक्र विजेता डम्बर बहादुर सिंह चंद की स्मृति में स्मृति द्वार बनाया गया है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जिस मार्ग के प्रवेश पर शहीद की स्मृति दिखाई देती है, क्या उस मार्ग की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से नहीं ली जानी चाहिए?
कमल सिंह चंद का आरोप है कि क्षेत्रीय विधायक द्वारा सड़क के प्रारंभ में स्मृति द्वार तो बनाया गया, लेकिन सड़क की बदहाली की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के जिला अध्यक्ष का घर भी इसी सड़क पर है, बावजूद इसके सड़क की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। कमल सिंह चंद के अनुसार उन्हें व्यक्तिगत रूप से और संदेश के माध्यम से भी समस्या की जानकारी दी गई है।
UKD नेता के अनुसार स्थानीय स्तर पर समस्या को लेकर Hello Help Pithoragarh के माध्यम से पिछले दो महीनों में तीन बार शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। उनका कहना है कि PWD की टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति देख भी चुकी है, लेकिन इसके बाद भी धरातल पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। यानी शिकायत हुई, विभाग को जानकारी मिली, मौके का निरीक्षण भी हुआ—फिर कार्रवाई किस स्तर पर अटकी है ?
जिलाधिकारी ने हाल ही में सड़कों से जुड़े विभागीय अधिकारियों की बैठक में स्पष्ट कहा था कि खराब मौसम का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से बचना बंद करें और सड़कों की मरम्मत व गड्ढामुक्ति का काम नियमित रूप से किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यातायात सुगम बनाए रखने में विभागीय लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
मीडिया के माध्यम से प्रशासन लगातार सड़कों की स्थिति पर निगरानी और सवाल उठाता रहा है। प्रशासन कह रहा है कि बहाना नहीं चलेगा—तो फिर सवाल यह है कि विभागीय निरीक्षण के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
जब सड़क बार-बार डामरीकरण के बाद भी नालियों के अभाव में टूट रही है, पुल की सुरक्षा बैरीकेडिंग टूटी पड़ी है और दो महीने में तीन शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ—तो आखिर जिम्मेदारी किसकी है?
क्या सिर्फ गड्ढे भरना सड़क सुधार है, या जल निकासी और सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था करना भी विभाग की जिम्मेदारी है ? कपिल भट्ट वाणी न्यूज


