पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल महाकाली मंदिर लछैर में नंदाष्टमी के पावन पर्व पर आयोजित ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व का मेला शनिवार को भव्य रूप में संपन्न हुआ। मेले में सुबह से ही आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। दिनभर लछैर क्षेत्र मां महाकाली के जयकारों, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों से गूंजता रहा।

मेले का शुभारंभ पिथौरागढ़ विधायक मयूख सिंह महर ने किया। इस अवसर पर उन्होंने मेला महोत्सव समिति और क्षेत्रीय जनता को मेले के सफल आयोजन की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के सुख, समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना करते हुए लछैर मेले को प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने तथा इसे धार्मिक पर्यटन से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

मां महाकाली के डोले ने बढ़ाई मेले की भव्यता मेले का सबसे प्रमुख आकर्षण मां महाकाली का भव्य डोला रहा। पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं के बीच डोले के पहुंचते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। डोले के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने मां महाकाली के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

डोले के साथ चल रहे श्रद्धालुओं के जयकारों और ढोल-नगाड़ों की थाप से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। देव परंपरा से जुड़े डंगरियों की मौजूदगी ने भी आयोजन की धार्मिक गरिमा को बढ़ाया।

गोविंद दिगारी और खुशी दिगारी के गीतों पर झूमे दर्शक धार्मिक आयोजनों के साथ मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी धूम रही। लोकगायक गोविंद दिगारी और खुशी दिगारी के गीतों ने दर्शकों को खूब झुमाया। पारंपरिक लोकगीतों और संगीत पर दर्शक देर तक थिरकते नजर आए।

वहीं चंचल रावत की टीम ने भी मां भगवती के डोले के पहुंचने तक श्रद्धालुओं और मेले में मौजूद लोगों का भरपूर मनोरंजन किया। टीम की प्रस्तुतियों ने मेले के माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया।

आस्था के साथ दिखी कुमाऊं की लोक संस्कृति मेले में महिलाओं, युवाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की। पारंपरिक परिधानों में पहुंचीं महिलाओं और ग्रामीणों की मौजूदगी ने मेले में कुमाऊं की लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश की। मेले में स्थानीय दुकानों, खान-पान और विभिन्न स्टॉलों पर भी लोगों की भीड़ रही।

महोत्सव समिति के संयोजक कुंडल महर ने मेले में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं और अतिथियों का स्वागत किया तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले लोगों का आभार जताया।

लछैर का यह मेला धार्मिक आस्था, देव परंपरा, लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का ऐसा संगम बनकर सामने आया, जहां मां महाकाली की भक्ति के साथ कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत भी पूरे रंग में दिखाई दी। _ कपिल भट्ट वाणी न्यूज