थल, पिथौरागढ़। थल कस्बे की सबसे पुरानी मल्लीधारा पेयजल योजना पिछले करीब दो माह से पूरी तरह ठप पड़ी है। घरों तक पेयजल आपूर्ति बंद होने से 25 से अधिक परिवारों के सामने गंभीर जल संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी में लोगों को पीने के पानी के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ग्रामीण भूपेंद्र सिंह पांगती ने बताया कि वर्ष 1980 में बनी इस पेयजल योजना की पाइपलाइन स्रोत से थल कस्बे तक मात्र लगभग 800 मीटर लंबी है। इतनी छोटी लाइन होने के बावजूद विभाग अब तक खराबी का पता नहीं लगा सका है, जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।
उन्होंने बताया कि 13 जुलाई को थल में आयोजित "जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार" जनता दरबार में भी इस समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। लेकिन मामला उठाए जाने के छह दिन बाद भी जलापूर्ति बहाल नहीं हो सकी है और लोगों के घरों के नलों में अब तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और संबंधित विभाग की अनदेखी के कारण उन्हें लंबे समय से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आक्रोशित उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पांच दिनों के भीतर पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं की गई तो वे उग्र आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।
इस संबंध में जल संस्थान, बेड़ीनाग के अवर अभियंता कमलेश मेहता ने बताया कि पेयजल लाइन में आई खराबी को दूर करने का कार्य किया जा रहा है और शीघ्र ही लाइन ठीक कर जलापूर्ति सुचारु कर दी जाएगी।
रिपोर्ट: अनिल कार्की, थल


