पिथौरागढ़। सिल्थाम से रई कालशिन मंदिर तक राष्ट्रीय राजमार्ग की बदहाल स्थिति अब राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरे का कारण बनती जा रही है। ग्रीफ गेट के पास सड़क पर बने गहरे गड्ढों और खराब सतह के चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। खास बात यह है कि जिलाधिकारी द्वारा सड़क की स्थिति सुधारने के सख्त निर्देश दिए जाने के बावजूद मौके पर स्थिति में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है।
ग्रीफ गेट के समीप सड़क पर जगह-जगह बने गड्ढे वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। सड़क की स्थिति ऐसी है कि सामने से आने वाले वाहनों को बचाने के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर आवाजाही लगातार बढ़ रही है, ऐसे में सड़क की अनदेखी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
जेई एनएच के अनुसार, फिलहाल सड़क के गड्ढों में मिट्टी और रोड़ी डालकर कच्चा पैचवर्क किया जाएगा। विभाग की ओर से यह कार्य दो-चार दिन बाद किए जाने की बात कही गई है। सवाल यह है कि जब सड़क पर हादसे का खतरा बना हुआ है तो मरम्मत के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?
रई वार्ड के पार्षद मोनू चौसाली ने सड़क की स्थिति के साथ-साथ कलमठों की समस्या पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस सड़क पर बने लगभग सभी कलमठ बंद पड़े हैं। केवल रई धारा वाला कलमठ ही खुला है। उन्होंने बताया कि ग्रीफ को इस संबंध में कई बार सूचित किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। कलमठों के बंद होने से बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित होने की आशंका है। पहाड़ी क्षेत्र में अचानक होने वाली बारिश को देखते हुए यह स्थिति सड़क के लिए और अधिक गंभीर साबित हो सकती है।
पिछले दिनों जिलाधिकारी ने पंडा बाईपास का स्थलीय निरीक्षण कर सड़क की स्थिति का जायजा लिया था। निरीक्षण के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब सड़क की बदहाली दूर होगी और संबंधित विभाग तेजी से काम करेगा। लेकिन निरीक्षण को चार दिन बीत जाने के बाद भी सड़क की स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। मानस स्कूल के पास पुलिया के समीप गन्ने के जूस का ठेला लगाने वाली दुकानदार ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जिलाधिकारी के आने से उन्हें उम्मीद जगी थी कि सड़क की दशा सुधरेगी, लेकिन उनके जाने के बाद आज तक कोई अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं आया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिलाधिकारी के निरीक्षण और सख्त निर्देशों के बाद भी संबंधित विभाग सक्रिय नहीं होता है तो आम जनता की शिकायतों और प्रशासनिक निर्देशों का क्या महत्व रह जाता है ? एक तरफ सड़क पर बने गड्ढे हादसे को न्योता दे रहे हैं, दूसरी तरफ बंद कलमठ जल निकासी की समस्या पैदा कर रहे हैं और विभाग मरम्मत के लिए दो-चार दिन बाद कच्ची भराई की बात कह रहा है।
अब सवाल यह है कि इसे विभागीय लापरवाही कहा जाए या प्रशासनिक निर्देशों के क्रियान्वयन की कमजोरी? आखिर सड़क की स्थिति सुधारने के लिए किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया जा रहा है ? _ कपिल भट्ट वाणी न्यूज़


