थल (पिथौरागढ़)। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते थल के निकट नागीमल पहाड़ी पर एक बार फिर भारी भूस्खलन हो गया। शनिवार देर रात करीब 1 बजे पहाड़ी से भारी मात्रा में बोल्डर और मलबा थल–सातशिलिंग राजमार्ग पर आ गिरा, जिससे जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ को जोड़ने वाला यह अत्यंत व्यस्त मार्ग पूरी तरह बंद हो गया।
मार्ग बंद होने से पिथौरागढ़ की ओर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। यात्रियों, स्थानीय लोगों और आवश्यक सेवाओं पर इसका व्यापक असर पड़ा। सबसे अधिक प्रभाव दूध आपूर्ति पर पड़ा, क्योंकि पिथौरागढ़ से थल क्षेत्र में आने वाली दूध की सप्लाई भी बाधित हो गई। इससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार नागीमल पहाड़ी पिछले लगभग दो वर्षों से लगातार भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील बनी हुई है। बरसात के मौसम में यहां अक्सर मलबा और बोल्डर गिरने से राजमार्ग बंद हो जाता है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सड़क खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) की ओर से दोनों छोरों पर दो जेसीबी मशीनें लगाकर मलबा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर किया जा रहा है। हालांकि, लगातार दरक रही चट्टानों और ऊपर से गिरते बोल्डरों के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
लोनिवि के अवर अभियंता मुकेश जुकरिया ने बताया कि पहाड़ी से लगातार बोल्डर और मलबा गिरने के कारण सड़क खोलने का कार्य अत्यंत जोखिमपूर्ण है। श्रमिकों और मशीन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक मलबा हटाया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि मौसम ने साथ दिया तो शाम करीब 5 बजे तक मार्ग पर यातायात बहाल किया जा सकता है।
बार-बार हो रहे भूस्खलन से स्थानीय लोगों ने नागीमल पहाड़ी के स्थायी उपचार और सुरक्षा कार्यों की मांग दोहराई है, ताकि हर बरसात में सड़क बंद होने की समस्या से स्थायी राहत मिल सके।
_ANIL KARKI : THAL


