मुनस्यारी। उत्तराखंड की पहाड़ी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। मुनस्यारी में राजकीय प्राथमिक विद्यालय रूमीढोला में तैनात शिक्षक को राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में शिक्षण व्यवस्था के लिए भेजे जाने का आदेश सामने आने के बाद इस फैसले को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

1 सितंबर 2026 को जारी आदेश में प्राथमिक विद्यालय रूमीढोला में तैनात शिक्षक को राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में शिक्षण कार्य के लिए तत्काल उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। आदेश सामने आने के बाद सवाल उठे कि प्राथमिक स्तर के शिक्षक को इंटर कॉलेज में भेजना किस हद तक उचित है और क्या इससे प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी।

हालांकि, मामले में मुख्य शिक्षा अधिकारी पिथौरागढ़ तरुण पंत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि राजकीय इंटर कॉलेज बांसबगड़ में वर्तमान में 11 शिक्षक उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की समस्या और विद्यालय की परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षण व्यवस्था के लिए यह वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी।

सीईओ के अनुसार, संबंधित शिक्षक वहां गए ही नहीं। उनकी असहमति के कारण आदेश को तत्काल निरस्त कर दिया गया। यानी यह व्यवस्था स्थायी रूप से लागू नहीं हुई और शिक्षक को इंटर कॉलेज में कार्यभार ग्रहण नहीं करना पड़ा।

मामले में विभाग का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। एक ओर विभाग का कहना है कि विद्यालय में 11 शिक्षक उपलब्ध हैं और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था का प्रयास किया गया था, वहीं दूसरी ओर आदेश में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को इंटर कॉलेज भेजे जाने से शिक्षक व्यवस्था और छात्र हित को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब सवाल यह है कि यदि इंटर कॉलेज में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता किन परिस्थितियों में महसूस हुई? स्थानीय लोगों ने ऐसी कौन सी समस्या विभाग के सामने रखी थी, जिसके कारण यह आदेश जारी करना पड़ा? और भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर विभाग की स्थायी व्यवस्था क्या होगी?

यह मामला भले ही आदेश निरस्त होने के बाद समाप्त हो गया हो, लेकिन इसने दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षक उपलब्धता, वैकल्पिक व्यवस्थाओं और प्रशासनिक फैसलों की प्रक्रिया पर बहस जरूर छेड़ दी है।

फिलहाल विभाग ने आदेश निरस्त कर दिया है, लेकिन सवाल बाकी है—जब विद्यालय में 11 शिक्षक उपलब्ध थे, तो प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक को इंटर कॉलेज भेजने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी ? _ कपिल भट्ट वाणी न्यूज