नई दिल्ली। प्रधानमंत्री ने गुरुवार को आयोजित Economic Roadmap Business Reception को संबोधित करते हुए भारत और ऑस्ट्रेलिया को प्राकृतिक और विश्वसनीय साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा संकट के बीच दोनों देशों की रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। � प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में हुए व्यापार समझौते के बाद भारत से ऑस्ट्रेलिया को निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अब दोनों देश व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने उद्योग जगत से इस साझेदारी को निवेश और नवाचार के माध्यम से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया। � उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा तथा न्यूक्लियर सेक्टर में ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और संसाधन भारत के ऊर्जा परिवर्तन को गति दे सकते हैं। हाल ही में निजी कंपनियों के लिए परमाणु क्षेत्र खोले जाने के बाद इस क्षेत्र में भी सहयोग की व्यापक संभावनाएं बनी हैं। � Press Release Page _ Press Information Bureau.pdf प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई अड्डों और शहरी बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश के अवसर उपलब्ध हैं। साथ ही स्टील, ग्रीन आयरन, एल्युमिनियम, डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर वैश्विक समाधान विकसित कर सकते हैं। � Press Release Page _ Press Information Bureau.pdf उन्होंने शिक्षा और कौशल विकास को भी दोनों देशों की साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए छात्र गतिशीलता को "टैलेंट पार्टनरशिप" में बदलने पर बल दिया। इसके अलावा राज्यों के बीच प्रत्यक्ष सहयोग बढ़ाने का सुझाव देते हुए विभिन्न भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई राज्यों के बीच सेक्टर आधारित साझेदारी विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। � Press Release Page _ Press Information Bureau.pdf अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संवाद नई साझेदारियों, नए विचारों और नए निवेश अवसरों को जन्म देगा तथा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगा। �