नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 9 जुलाई 2026 को मेलबर्न में आयोजित तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई मिली। दोनों देशों ने असैन्य परमाणु सहयोग समझौते के तहत प्रशासनिक व्यवस्था को अंतिम रूप देते हुए भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया से दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त किया।
इस निर्णय के साथ भारत के तेजी से बढ़ रहे परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को स्थिर ईंधन आपूर्ति मिलेगी। ऑस्ट्रेलिया विश्व के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार वाले देशों में शामिल है और यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावॉट तक पहुंचाना है। इस दिशा में नए परमाणु संयंत्रों के निर्माण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और आधुनिक परमाणु तकनीकों के विकास को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
भारत वर्तमान में 24 परमाणु रिएक्टरों का संचालन कर रहा है, जबकि कई नई इकाइयों का निर्माण जारी है। साथ ही, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) और फास्ट ब्रीडर रिएक्टर जैसी उन्नत तकनीकों पर भी तेजी से काम हो रहा है।
शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सहयोग, ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर भी सहमति जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की दीर्घकालिक उपलब्धता भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों, 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की प्रतिबद्धता तथा बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) की सदस्यता के लिए भारत के समर्थन की भी पुष्टि की। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने वाला अहम कदम माना जा रहा है।


