थल। सावन के आखिरी सोमवार के अवसर पर बालेश्वर महादेव मंदिर में सुबह तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह करीब 4 बजे से शुरू हुआ श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला दोपहर 3 बजे तक लगातार जारी रहा। सुबह 4 से 6 बजे तक हल्की बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई।

विशेष रूप से महिलाओं ने बारिश की परवाह किए बिना मंदिर के गर्भगृह में स्थित स्वयंभू बाल शिवलिंग के दर्शन किए और विधि-विधान से जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। वहीं बालेश्वर मंदिर की आधी परिक्रमा का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं ने आधी परिक्रमा कर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान किया।

इस दौरान भक्तों ने मंदिर परिसर में स्थित हनुमान मंदिर, केदारशिला, गंगा पूजन और प्रेतशिला की भी पूजा-अर्चना की। इसके बाद भैरवनाथ मंदिर में खिचड़ी का भोग लगाया गया।

मंदिर के पुजारी भास्कर भट्ट ने श्रद्धालुओं को बारी-बारी से गर्भगृह में ले जाकर बाल शिवलिंग के दर्शन कराए। वहीं महिलाओं ने अपने परिवार की नवग्रह शांति और अरिष्टों के निवारण के लिए मंदिर परिसर में पुरोहितों द्वारा शांति पाठ, शिवर्चन और रुद्री का आयोजन भी कराया।

सावन के अंतिम सोमवार पर पूरे मंदिर परिसर में सुबह से ही ‘हर हर महादेव’ के जयकारों और भक्ति के माहौल से श्रद्धालुओं में उत्साह बना रहा।

रिपोर्ट: अनिल कार्की, थल VANI NEWS